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All the posts here are writings of Sri Kaulbhaskar Guru Ji

चक्र-पूजा के मण्डल
चक्र-पूजा के मण्डलों की रचना-यह परम्परा भेद से भिन्न-भिन्न हो सकता है ।
|by KAULBHASKAR GURU JI

संकट-नाशिनी श्री दश-मयी बाला-स्तोत्र
मेरु-तन्त्रोक्त दश-महाविद्या-मयी श्रीबाला-त्रिपुर-सुन्दरी का यह स्तोत्र समस्त संकटों का नाश करता है ।
|by KAULBHASKAR GURU JI

आगमोक्त शिव तत्व
आगमोक्त षट्-त्रिंशत् तत्त्वों को स्थुल रूप से आत्मतत्त्व, विद्यातत्त्व और शिवतत्त्व इन तीन विभागों में रखा गया है। आत्मतत्त्व में २४ तत्त्वों, विद्यातत्त्व में ७ तत्त्वों और शिवतत्त्व में ५ तत्त्वों का समावेश है। शिवतत्त्व के अंगीभूत शिव तत्त्व, शक्ति तत्त्व, सदाशिव तत्त्व, ईश्वर तत्त्व और विद्या(शुद्धविद्या) तत्त्व पर एक संक्षिप्त विवेचना
|by KAULBHASKAR GURU JI

श्रीविद्या साधनअंगभूता श्रीमहागणपति साधन
श्रीविद्या साधना के पूर्व महागणपति के साधन की आवश्यकता
|by KAULBHASKAR GURU JI




