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All the posts here are writings of Sri Kaulbhaskar Guru Ji

कलिकाल के लिए तन्त्र की महत्ता

कलिकाल के लिए तन्त्र की महत्ता

बिना ह्यागममार्गेण नास्ति सिद्धि: कलौ प्रिये-कलियुग में आगम(तन्त्र) मार्ग के अलावा और किसी मार्ग से सिद्धि नहीं हो सकती। कलियुग में गृहस्थ केवल आगम-तन्त्र के अनुसार ही कार्य करेंगे। अन्य मार्गों से गृहस्थों को कभी सिद्धि नहीं होगी।

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श्रीमद् आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र घटित चण्डी पाठ

श्रीमद् आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र घटित चण्डी पाठ

सम्पूर्ण कामनाओं की यथाशीघ्र सिद्धि के लिए मैथिलों में प्रसिद्ध श्रीमद् आपदुद्धारक-बटुक-भैरव-स्तोत्र घटित चण्डी पाठ

|by KAULBHASKAR GURU JI
तन्त्र शास्त्र में क्रम-दीक्षा

तन्त्र शास्त्र में क्रम-दीक्षा

तन्त्र शास्त्र में क्रम-दीक्षा का बड़ा महत्व दिया गया है। इसमें मन्त्रों का षट्-चक्र शोधन नहीं होता। यह दीक्षा सिर्फ कौल-गुरु की अद्वितीय कृपा से ही उपलब्ध होती है। इसमें दिवस, मास और वर्षों के क्रम से दीक्षा और अभिषेक होते रहते हैं, अतएव इसका नाम क्रम-दीक्षा है।

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मेरी कुलदेवी श्री बाला त्रिपुर सुन्दरी

मेरी कुलदेवी श्री बाला त्रिपुर सुन्दरी

श्रीबालात्रिपुरसुन्दरी का संक्षिप्त परिचय

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अदीक्षितों के लिए अनुभूत साधना

अदीक्षितों के लिए अनुभूत साधना

यह अनुभूत साधन मेरे कौलावधूत गुरु द्वारा, जब मैं उनसे दीक्षित नहीं हुआ था तब, मुझे बताया गया था । मेरे साथ-साथ असंख्य व्यक्तियों द्वारा यह अनुभूत है । प्रातः एवं रात्री काल एक निश्चित समय पर इसे कर के कोई भी इसके लाभ को अनुभव कर सकता है ।

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श्री महर्षि मार्कण्डेय प्रणीत सरस्वती साधना

श्री महर्षि मार्कण्डेय प्रणीत सरस्वती साधना

देवि सरस्वती की वह रहस्यमय साधना जिसे महर्षि मार्कण्डेय ने किया था

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षट्-त्रिंशत तत्व का उपदेश

षट्-त्रिंशत तत्व का उपदेश

षट्-त्रिंशत तत्व का उपदेश महानारायणोपनिषद् , नारद परिव्राजकोपनिषद् में दिया गया है जिन्हें शुद्ध, शुद्धाशुद्ध तथा अशुद्ध कोटि में विभक्त किया गया है ।

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श्री महात्रिपुरसुन्दरी का कुण्डलिनी स्वरूप

श्री महात्रिपुरसुन्दरी का कुण्डलिनी स्वरूप

श्री महात्रिपुरसुन्दरी का कुण्डलिनी स्वरूप को चित्र के रूप में दिखाया गया है ।

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श्री श्रीविद्या खड्ग-माला

श्री श्रीविद्या खड्ग-माला

श्री श्रीविद्या खड्ग-माला श्रीविद्या के १५ विग्रहों का उनके शिव-सहित आराधना का विज्ञान है ।श्रीविद्या के १५ विग्रह और उनके शिव ...... ।

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