KAULBHASKAR Guru Ji is in Patna. Available on What's App

मन्त्रों के दोष

2022-10-01

मन्त्रों के दोष

छिन्नो रुद्ध: शक्तिहीन: पराङ्गमुख उदीरित:

बधिरो नेत्रहीनश्च कीलित: स्तम्भितस्तथा।।

दग्ध: स्त्रस्तश्च भीतश्च मलिनश्च तिरस्कृत:

भेदितश्च सुषुप्तश्च मदोन्मत्तश्च मूर्च्छित:।।

हृतवीर्यश्च हीनश्च प्रध्वस्तो बालक: पुन:

कुमारस्तु युवा प्रौढो वृद्धोनिस्त्रिंशकस्तथा।।

निर्वीर्य: सिद्धिहीनश्च मन्द: कूटस्तथा पुन:

निरंशक: सत्त्वहीन: केकरो जीवहीनक:।।

धूमितालिङ्गितौ स्यात्तां मोहितस्तु क्षुधार्त्तक:।।

अतिदृप्तोऽङ्गहीन: स्यादतिक्रुद्ध: समीरित:।।

अतिक्रूरश्च सव्रीड: शान्तमानस एव च

स्थानभ्रष्टश्च विकलो निऽस्नेह: परिकीर्त्तित:।।

अतिवृद्ध: पीड़ितश्च वक्ष्याम्येषां त लक्षणम्।।

रावण के मन्त्र-दोष सम्बन्धित प्रश्न करने पर महादेव ने समस्त मन्त्रों को उपरोक्त छिन्न, रुद्ध: आदि दोषों में से किसी न किसी दोष से दूषित बताया। बिना इन दोषों को दूर किये आप चाहे करोड़ो मन्त्र जप ले पर कोई लाभ नहीं होगा अपितु विपरीत फल की प्राप्ती होगी।

KAULBHASKAR GURU JI

KAULBHASKAR GURU JI

A SRIVIDYA UPASKA