KAULBHASKAR Guru Ji is in Patna. Available on What's App
← Back to Blog

षोडशी विद्या का गोपनीयत्व

KAULBHASKAR GURU JI

2022-10-03

षोडशी विद्या का गोपनीयत्व इस विषय पर देवी के पूछे जाने पर ईश्वर क्या जबाब देते हैं यह देखें :

श्री देव्युवाच-

परब्रह्मतया साक्षाच्छ्रीविद्या षोडशाक्षरी।

कथयं त्वं महादेव यद्यहं तव वल्लभा।।

श्री देवी कहती हैं- हे महादेव! यदि मैं आपकी प्रिय हूँ, तब यह बताने की कृपा करे कि साक्षात् परब्रह्मरूप षोडश अक्षर वाली श्रीविद्या क्या है?

ईश्वर उवाच-

शठत्वेन वरारोहे श्रीविद्यामन्त्रविद्बुध:।

योगिनीनां भवेद्भक्ष्य: श्रीगुरौ: शासनात्प्रिये।।

ईश्वर कहते हैं- हे प्रिये! हे वरारोहे! यदि श्रीविद्या के ज्ञाता शठ हों तब वे योगिनीगण के भक्ष्य होते हैं। यह श्रीगुरु शासन (आदेश) है।

षोडशार्णां महाविद्यां न दद्यात्कस्यचित् प्रिये।

राज्ञे राज्यप्रदायापि पुत्राय प्राणदाय वा।।

देयं तु सकलं भद्रे साम्राज्यमपि पार्वति।

शिरोऽपि प्राणसहितं न देया षोडशाक्षरी।।

हे प्रिये! षोडशवर्णात्मक विद्या किसी को प्रदान न करे। राज्य प्रदानकारी राजा को भी, पुत्र को भी अथवा प्राणदान के बदले भी यह विद्या प्रदान न करे।

हे पार्वती! हे भद्रे! सब कुछ दे दे, साम्राज्य भी प्रदान कर दे, प्राणों के साथ मस्तक भी अर्पित कर दे लेकिन षोडशाक्षरी किसी को नहीं देना चाहिए।

उच्चार्यमाणा ये मन्त्रास्ते सर्वे वाचिका: प्रिये।

उच्चाररहितं वस्तु श्रीविद्या षोडशाक्षरी।।

जिन सब मन्त्रों का उच्चारण किया जाता है, वे वाचिक हैं। षोडशाक्षरी तो उच्चारण रहित है।

ब्रह्मविद्यास्वरूपेण भुक्तिमुक्ति फलप्रदा।

एकोच्चारेण देवेशि वाजपेयस्य कोटय:।।

यह १६ अक्षरों वाली विद्या श्रीविद्या हीं ब्रह्मविद्यारूप से भोग तथा मोक्ष फल देती है। इसका एक बार का उच्चारण हजारों बाजपेय यज्ञ का फल देता है।

अश्वमेधसहस्राणि प्रादक्षिण्यं भुवस्तथा।

काश्यादितीर्थयात्राश्च सार्धकोटित्रयान्विता:।।

इसका एक बार का उच्चारण हजारों अश्वमेध यज्ञ, समस्त पृथ्वी की प्रदक्षिणा तथा साढे तीन करोड़ काशी आदि तीर्थों की यात्रा का फल प्रदान करता है।

तुलां नार्हन्ति देवेशि नात्र कार्या विचारणा।

एकोच्चारेण गिरिजे किं पुनर्ब्रह्म केवलम्।।

हे देवेशि! जो इस श्रीविद्या का एक बार उच्चारण करता है, उससे जो फल मिलेगा, उसकी तुलना हीं नहीं है। इस पर विचार नहीं करना चाहिए। इसका फल और क्या कहे, ब्रह्म भी इसके बराबर नहीं है।

End of Post
KAULBHASKAR GURU JI

KAULBHASKAR GURU JI

A SRIVIDYA UPASKA