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गुरु पादुका मन्त्र का पुरश्चरण

KAULBHASKAR GURU JI

2022-10-03

शक्ति साधना में पूर्णाभिषेक के समय गुरु पादुका मन्त्र प्राप्त होता है और शक्ति उपासक सबसे पहले इसी गुरु पादुका मन्त्र का पुरश्चरण करता है । गुरु पादुका मन्त्र से श्रेष्ठ कोई मन्त्र नहीं है ।

संकल्प : ………………………श्री गुरु परदेवता प्रीत्यर्थे श्री गुरु पादुका मन्त्रस्य (यहाँ अपेक्षित संख्या का उल्लेख करें यथा अष्टोत्तर शत /अष्टोत्तर सहस्त्र) जप अहं करिष्ये ।

विनियोग :

ॐ अस्य श्री गुरु पादुका मन्त्रस्य परम शिव ऋषिः विराट छन्दः श्री गुरु परमात्मा देवता हं बीजं सः शक्तिः क्रौं कीलकं श्री गुरु परदेवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगः ।

ऋष्यादिन्यास :

परम शिव ऋषये नमः शिरसि ।

विराट छन्दसे नमः मुखे ।

श्री गुरु परमात्मा देवतायै नमः हृदि ।

हं बीजाय नमः गुह्ये ।

सः शक्तये नमः पादौ ।

क्रौं कीलकाय नमः नाभौ ।

श्री गुरु परदेवता प्रीत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।

करन्यास :

ॐ हं सां अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।

ॐ हं सीं तर्जनीभ्यां स्वाहा ।

ॐ हं सूं मध्यमाभ्यां वषट् ।

ॐ हं सैं अनामिकाभ्यां हुम् ।

ॐ हं सौं कनिष्ठिकाभ्यां वौषट् ।

ॐ हं सः करतलकरपृष्ठाभ्यां फट् ।

हृदयादिन्यास :

ॐ हं सां हृदयाय नमः ।

ॐ हं सीं शिरसे स्वाहा ।

ॐ हं सूं शिखायै वषट् ।

ॐ हं सैं कवचायै हुम् ।

ॐ हं सौं नेत्र-त्रयाय वौषट् ।

ॐ हं सः अस्त्राय फट् ।

ध्यान :

जो गुरु से प्राप्त हो । श्री-कुल और काली-कुल के अनुसार ये अलग-अलग है ।

मन्त्र : जो गुरु से प्राप्त हो । लघु, स्थूल और वृहद् ये गुरु पादुका के तीन भेद/प्रकार है ।

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