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All the posts here are writings of Sri Kaulbhaskar Guru Ji

कुमारी पूजन

कुमारी पूजन

कुमारी-पूजन की विधि

|by KAULBHASKAR GURU JI
पंचपात्रात्मक चक्रानुष्ठान / दशपात्रात्मक आनन्दानुष्ठान

पंचपात्रात्मक चक्रानुष्ठान / दशपात्रात्मक आनन्दानुष्ठान

तन्त्र के रहस्यात्मक पूजन चक्रार्चन में गृहस्थ साधकों को पंच-पात्र की अनुमति है। विशेष योग्य साधक दश पात्र तक कर सकते हैं। दश से ज्यादा.......

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उत्तर कौलो के नवपुष्प

उत्तर कौलो के नवपुष्प

स्वपुष्प, स्वंयभू कुसुम आदि उत्तर कौलो के नवपुष्पों का विवरण ।

|by KAULBHASKAR GURU JI
Matsyendra Nath - My Great Grand Guru

Matsyendra Nath - My Great Grand Guru

A brief about my great grand guru Sri MATSYENDRANATH Ji, a legend of the Naths and one of 84 Maha Siddhas.

|by KAULBHASKAR GURU JI
सर्वसिद्धिकृत स्तोत्र

सर्वसिद्धिकृत स्तोत्र

यथा नाम तथा गुण- यह स्तोत्र पाठ मात्र से समस्त सिद्धियों को देता है

|by KAULBHASKAR GURU JI
कुलशास्त्र में वर्णित उर्ध्वाम्नाय:

कुलशास्त्र में वर्णित उर्ध्वाम्नाय:

वेद, शास्त्र और पुराण आदि सभी सर्वत्र प्रकाशन के योग्य हैं। किन्तु शाक्त और शैव जितने आगम हैं, वे सर्वप्रकाश्य नहीं माने जाते। उन्हे इसी आधार पर रहस्यशास्त्र कहते हैं। जहाँ तक कुलशास्त्रों का प्रश्न है, ये केवल रहस्य हीं नही, अपितु रहस्यातिरहस्य शास्त्र माने जाते हैं।

|by KAULBHASKAR GURU JI
साधको की साधना-सहचरी के लक्षण

साधको की साधना-सहचरी के लक्षण

साधको की साधना-सहचरी को शक्ति कहते हैं। पूरी शाक्तोपासना शक्ति के सहयोग पर हीं निर्भर है।

|by KAULBHASKAR GURU JI
श्रीविद्या-खड्गमाला के काम्य फल

श्रीविद्या-खड्गमाला के काम्य फल

श्रीविद्या-खड्गमाला १५ माला- मन्त्रों का समुह है। निष्काम व सकाम भेद से इन मालाओं के अलग-अलग ध्यान हैं। यहाँ सकाम ध्यान और उनके फल की चर्चा ...... ।

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श्री धन-प्रद महालक्ष्मी सिद्ध मन्त्र

श्री धन-प्रद महालक्ष्मी सिद्ध मन्त्र

महालक्ष्मी की मन्त्र साधना

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