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All the posts here are writings of Sri Kaulbhaskar Guru Ji

श्रीमद्-गुरु-कवचम् (ब्रह्म-यामले)
ब्रह्म-यामल में वर्णित यह गुरु-कवच साधक को त्रैलोक्यविजयी बनाता और मन्त्र-सिद्धि प्रदान करता है।
|by KAULBHASKAR GURU JI

FEMALE BORN IN ASHVINI NAKSHATRA
Physical Features, Character and other results of female born in ASHVINI NAKSHATRA
|by KAULBHASKAR GURU JI

MALE BORN IN ASHVINI NAKSHATRA
Physical Features, Character and other results of male born in ASHVINI NAKSHATRA
|by KAULBHASKAR GURU JI

श्रीविद्या के बाह्य पूजा के अधिकारी
महामहाभट्टारिका महाकामेश्वराङ्कनिलया श्रीमहात्रिपुरसुन्दरी श्रीविद्या के बाह्य पूजा के अधिकारी वही हैं जो आन्तर पूजा में समर्थ हैं। आन्तर पूजा से जाग्रत किया आत्मतेज.....।
|by KAULBHASKAR GURU JI

श्रीबाला-सहस्राक्षरी स्तोत्रम्
श्रीबालात्रिपुरसुन्दरी का यह सहस्राक्षरी स्तोत्र समस्त अरिष्टों का नाश करने में अतिप्रभावी है
|by KAULBHASKAR GURU JI

षट्-पञ्चाशिका in Horary Astrology
प्रश्न ज्योतिष-षट्-पञ्चाशिका के सूत्र का अवलोकन
|by KAULBHASKAR GURU JI

ऊर्ध्वाम्नायोक्त सिद्ध वीरौघ-गुरु-कवच
ऊर्ध्वाम्नायोक्त औघ-त्रय अंतर्गत वीरौघ-गुरु का यह कवच काफी चमत्कारी है।
|by KAULBHASKAR GURU JI

